शासकीय औद्योगिक संस्था – सेंटर ऑफ़ एक्स्सिलेंस

1. योजना के उद्देश्य :-

(१) उधोगों की आवश्यकता के अनुरूप नये मल्टी स्किल मोडूलर कोर्सेस प्रारंभ करना |
(२) इन्फ्रास्ट्रकचर सुविधाओं जैसे भवन ,उपकरणों आदि का सुदृढ़ीकरण |
(३) योजना एवम प्रशिक्षण कार्यक्रमों को लागु करने में उद्योगों की भागीदारी से नई प्रशिक्षण तकनीक लागु करना |
(४) इन सेंटर्स को शैक्षणिक ,प्रशासनिक, वित्तीय एवम प्रबंधन संबंधी स्वायतत्ता प्रदान कर सशक्त बनाया जाना |
(५) स्थानीय उद्योगों के साथ साझेदारी स्थापित करना एवम संस्थान प्रबंधन समिति(institute management committee)का गठन कर प्रशिक्षण को पूर्णतया मांग अनुरूप (demand driven)बनाना |

२. परियोजना का आउटपुट:- उपयुक्त अधोसंरचना की उपलब्धता के पश्चात प्रत्येक सेंटर से प्रति वर्ष 100 प्रशिक्षणर्थियों का प्रशिक्षित होना संभावित है

३. सार्वजनिक/निजी साझेदारी -संस्थान प्रबंधन समिति:-
इन सेंटर्स में सार्वजनिक /निजी साझेदारी इस योजना को तैयार करने एवम लागू करने में प्रत्येक स्तर पर उद्योगों की सक्रिय भागीदारी के रूप में होगी|यह भागीदारी प्रत्येक संस्था में संस्थान प्रबंधन समिति का गठन कर उसके माध्यम से की जावेगी | किसी ख्यातनाम उद्योग के प्रतिनिधि की अध्यक्षता में गठित होती है जिसमे राज्य शासन एवम उद्योगों के प्रतिनिधि शामिल रहते हैं |की मुख्य भूमिका एवम जिम्मेदारी निम्नानुसार होगी :-

१) विभिन्न माध्यमो, जैसे उद्योगों से कोई प्रोजेक्ट लेना आदि से राजस्व जुटाना आदि उसके उपयोग के सम्बन्ध में निर्णय लेना |
२) नए प्रशिक्षण क्षेत्रीय का अनुमान लगाना |
३) पाठ्यक्रम निर्माण/विकास |
४) प्रशिक्षनार्थियों का चयन |
५) प्रशिक्षकों को प्रशिक्षण |
६) संविदा / मेहमान प्रशिक्षकों की नियुक्ति |
७) प्रशिक्षनार्थियों की ‘ऑन-द-जॉब’ ट्रेनिंग |
८) परीक्षाये आयोजित कर प्रमाण पत्र प्रदान करना |
९) उत्तीर्ण प्रशिक्षनार्थियों का उद्योगों में नियोजन |

३.१) उपरोक्त के अतिरिक्त उद्योग एवं उद्योग एसोसीएशन द्वारा वित्तीय सहायता एवं दान स्वरुप उपकरण भी उपलब्ध कराये जा सकते है |

३.२) राज्यशासन द्वारा आई एम् सी को सुसंगत अधिकार प्रदान किये जायेंगे ताकि वह उपरोक्त उल्लेखित भूमिका एवं जिम्मेदारी का भली प्रकार से निर्वहन कर सके | इन अधिकारों में संविदा / मेहमान प्रशिक्षकों की नियुक्ति एवं भारत शासन को भवन निर्माण एवं उपकरणों के क्रय के प्रस्ताव भेजे जाने के पूर्व उनका अनुमोदन भी शामिल है |

४) पाठ्यक्रम का स्वरुप – सेण्टर ऑफ़ एक्सिलेंस में चलाये जाने वाला पाठ्यक्रम का स्वरुप निम्न अनुसार होगा :-

१) प्रथम वर्ष में औद्योगिक प्रक्षेत्र (INDUSTRIAL SECTOR) के अनुरूप विभिन्न कौशल छेत्रों में (SKILL AREAS) में Broad Based Basic Training दी जाएगी (BBBT) |
२) BBBT के पश्चात आगामी ६ माह के लिए लघु अवधि मोड्यूलर एडवांस्ड कोर्स में प्रशिक्षण दिया जायेगा |
३) प्रथम वर्ष के BBBT एवं द्वितीय वर्ष के प्रथम छः माह लघु अवधि मोड्यूलर कोर्स की परीक्षाएं राष्ट्रीय व्यवसायिक प्रशिक्षण परिषद् (एन सी वी टी) द्वारा ली जाएगी |
४) प्रशिक्षण के अंतिम चरण में स्थानीय उद्योगों की आवश्यकताओ के अनुरूप विशेष (स्पेस्लाइज्ड) मोड्यूलर कोर्सेस आयोजित किये जायेंगे, जिसकी परीक्षाएं आयोजित करने एवं प्रमाण पत्र देने का कार्य संयुक्त रूप से राज्य शासन एवं उद्योग द्वारा किया जायेगा | इन प्रमाण पत्रों को (एन सी वी टी) द्वारा मान्यता दी जाएगी |
५) पाठ्यक्रम में कम से कम २५ से ४० प्रतिशत ‘शॉप फ्लोर ट्रेनिंग’ शामिल होगी, जिसका निर्धारण उद्योग संघो से चर्चा कर किया जायेगा |

५) राज्य / आई टी आई के चयन का मापदंड :- किसी भी राज्य में “सेंटर ऑफ एक्स्सिलेंस” हेतु किसी आई टी आई का चयन राज्य शासन द्वारा निम्नलिखित मार्गदर्शी सिद्धांतो के आधार पर किया जायेगा :-

(१) चयनित आई ० टी ० आई ० के आस पास एक विशेष प्रकार के उद्योगों जैसे ऑटोमोबाइल,एलेक्ट्रौनिक्स,केमिकल,इन्फोरमेशन टेक्नोलोजी आदि का समूह /बहुतायत होनी चाहिए |
(२) चयनित आई ० टी ० आई ० में imc गठित हो ताकि सार्वजनिक /भागीदारी के माध्यम से योजना का क्रियान्वयन हो सके |
(३) चयनित आई ० टी ० आई ० में पर्याप्त भूमि एवम आधारभूत संरचना के उन्नयन हेतु पर्याप्त स्थान के साथ साथ स्वयं का भवन होना चाहिए |

(६)योजना के अवयव :-

(१)संचालित आई ० टी ० आई ० के परिवर्धन /परिवर्तन / सुदृढ़ीकरण/ पुनरुद्धार हेतु निर्माण कार्य |
(२)उपकरणों का क्रय |
(३)संविदा / मेहमानों प्रशिक्षकों/स्टाफ को आवश्यकतानुसार मानदेय का भुगतान |
(४)प्रशिक्षकों एवम प्रबंधकीय अमले के प्रशिक्षण हेतु तकनीकी सहायता प्रदान करना |
(५)पाठ्यक्रम निर्माण/ विकास ,प्रशिक्षण सामग्री का क्रय/विकास ,कार्यालयीन व्यय , कार्यशाला /सेमीनार/सर्वेक्षण का आयोजन एवम प्रशिक्षण प्राप्त प्रशिक्षणर्थियों की ‘ट्रेसर स्टडी’ पर व्यय |

(७)अधोसंरचना का सृजन /उपयोग :-

(१)पूर्व से उपलब्ध अधोसंरचना का यथा संभव उपयोग “सेण्टर ऑफ़ एक्सिलेंस “में किया जायेगा |
(२)बी ० बी ० बी ० टी ० हेतु आवश्यक उपकरण सामान्यतया चयनित आई ० टी ० आई ०में उपलब्ध होंगे ,अन्यथा राज्य शासन नजदीकी आई ० टी ० आई ० से सम्बंधित व्यवसाय को प्रशिक्षक एवम उपकरणों सहित स्थानांतरित कर सकता है |
(३)सामान्यतया नए निवेश मोडुलर कोर्सेस हेतु अधोसंरचना विकसित करने में किये जायेंगे किन्तु जहाँ आवश्यक होगा वहां BBBT हेतु अधोसंरचना विकसित करने हेतु भी नए निवेश किये जा सकेंगे |

सी. ओ. ई. (B.B.BT.) में प्रवेशित प्रशिक्षणार्थी
क्र. बी. बी. बी. टी. का सत्र संख्या परीक्षा परिणाम
1 2008 65 उत्तीर्ण विद्यार्थियों की संख्या = 35
2 2009 48
3 2010 57 सत्र चालू है
सी. ओ. ई. एडवांस्ड मोड़्यूल
क्र. कोर्स का नाम – सत्र संख्या परीक्षा परिणाम
1
पी पी एम इलेक्ट्रिकल मेंटेनेंस 2009
20
2
पी पी एम मेकेनिकल मेंटेनेंस 2010
20
2
रेफ़्रिज़रेशन एंड एयर कंङीशऩिग़ 2010