शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्था – दुर्ग | एक सामान्य परिचय

औद्योगिक प्रशिक्षण संस्था दुर्ग का शुभारंभ १२ अक्टूबर १९८५ को ७ व्यवसाय (विद्युतकार, फिटर, मोटर मेकेनिक, ड्राफ्टमेन मेकेनिक, वेल्डर, आशुलिपि हिंदी तथा आशुलिपि अंग्रेजी व्यवसायों ) निजी भवन में हुआ था, तथा दिनांक 19/09/1997 में शासकीय भवन में स्थानान्तारारित हुआ |
वर्तमान में 20 एकड़ के विशाल परिसर में 10 व्यवसायों में अंचल के युवाओ को रोजगार मूलक प्रशिक्षण दिया जा रहा है | फरवरी 2008 में संस्था में CoE के अंतर्गत प्रोसेस प्लांट मेंटेनेंस सेक्टर प्रारंभ किया गया जिसके अंतर्गत बी. बी. बी. टी. में 6 मोड्यूल एवं 3 एडवांस मोड्यूल द्वारा वर्तमान में युवाओ को प्रशिक्षित किया जा रहा है | सेंटर ऑफ़ एक्स्सिलेंस के नए भवन का निर्माण कार्य प्रगति पर है | संस्था में कार्यरत ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट सेल द्वारा सर्वे एवं कैम्पस के माध्यम से प्रशिक्षणार्थियो को रोजगार उपलप्ध कराया जाता है |

दुर्ग जिले का नाम राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर लिया जाता है चूँकि भिलाई इस्पात संयंत्र दुर्ग से केवल १० किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, भिलाई इस्पात संयंत्र जहाँ प्रतिवर्ष हमारे सँस्थाओ से प्रशिक्षित कुशल कारीगरों को रोजगार प्रदान करता है | साथ ही भिलाई को औद्योगिक नगरी का दर्जा भिलाई इस्पात संयंत्र के कारण ही मिला है | लगभग ३५० छोटे-बड़े उद्योग भी भिलाई इस्पात संयंत्र की ही देन है | दुर्ग में एच. ई. जी स्पंज आयरन संयंत्र बोरई (रसमडा) तथा जैन समुदाय का पार्श्व तीरथ नगपुरा स्थित हैं | शिवनाथ नदी के तट पर यह शहर बसा हुआ हैं |